सेंसेक्स 1200 अंक टूटा, निवेशकों के ₹6.7 लाख करोड़ डूबे
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सेंसेक्स 1200 अंक तक टूटा और निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में करीब 6.74 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च में 1.13 लाख करोड़ रुपये निकाले, जिससे बाजार पर दबाव बना और रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरा।
Delhi/ भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 30 मार्च को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलते ही BSE Sensex 1000 अंकों से अधिक गिरकर 72,565.22 पर खुला, जबकि Nifty 50 269.95 अंकों की गिरावट के साथ 22,549.65 पर पहुंच गया।
शुरुआती कारोबार में ही बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि सेंसेक्स की गिरावट 1200 अंकों तक पहुंच गई और यह 72,391.98 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। इसी दौरान निफ्टी भी गिरकर 22,470.15 के स्तर तक पहुंच गया। बाजार की इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई और कुछ ही समय में करीब 6.74 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया।
आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को सेंसेक्स पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,22,15,450.82 करोड़ रुपये था, जो सोमवार को गिरकर 4,15,41,537.69 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष में कमी न आने के संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देश पर दबाव बढ़ा है।
घरेलू स्तर पर भी रुपये में कमजोरी ने बाजार को प्रभावित किया है। शुक्रवार को रुपया 89 पैसे गिरकर 94.85 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि सोमवार को शुरुआती कारोबार में इसमें सुधार देखने को मिला और यह 93.57 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन निवेशकों की धारणा पर इसका सकारात्मक असर सीमित रहा।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली भी बाजार गिरने का बड़ा कारण बनी है। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 1.13 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और लिक्विडिटी में कमी के कारण निवेशक विकसित बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव कम नहीं होता है, तो भारतीय बाजारों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।